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सिरसा की बेटी मेजर कर्मजीत कौर ने रचा इतिहास: 314 दिनों के ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ अभियान को किया पूरा, राष्ट्रपति-रक्षामंत्री ने किया स्वागत

सिरसा (हरियाणा): भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना (त्रि-सेवा) की 9 जांबाज महिला अधिकारियों ने विश्व के प्रथम ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ अभियान को अपने अटूट साहस और बुलंद हौसले से 314 दिनों की अत्यंत कठिन समुद्री यात्रा के उपरांत सफलतापूर्वक पूर्ण कर स्वर्णिम इतिहास रच दिया है।

इस गौरवमयी अभियान में हरियाणा के सिरसा की होनहार बेटी मेजर कर्मजीत कौर भी प्रमुख रूप से सम्मिलित थीं। मेजर कर्मजीत कौर के पति कोमलप्रीत सिंह स्वयं मर्चेंट नेवी में चीफ ऑफिसर के पद पर सेवारत हैं। 11 सितंबर 2025 को प्रारंभ हुए इस चुनौतियों एवं संकटों से भरे साहसिक अभियान को पूर्ण कर देश की बेटियों ने तिरंगा फहराते हुए सकुशल स्वदेश वापसी की।

🎖️ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जांबाज टीम का किया अभिनंदन

माननीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस अभूतपूर्व ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ अभियान दल की सफल वापसी पर उनका औपचारिक स्वागत एवं नागरिक अभिनंदन किया।

उन्होंने महिला सैन्य अधिकारियों के साहस की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए इस उपलब्धि को देश के युवाओं हेतु प्रेरणा का महान स्रोत बताया। इसके साथ ही, देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने भी इस साहसिक दल का औपचारिक स्वागत किया और महिला टीम के अदम्य पराक्रम की जमकर प्रशंसा की। सिरसा स्थित निज निवास पर मेजर कर्मजीत कौर के स्वजनों ने भी अपनी बेटी के सकुशल आगमन पर मिष्ठान खिलाकर इस राष्ट्रीय उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की।

🌊 314 दिनों में तय की 25,500 समुद्री मील की दूरी, पार किए दुनिया के 4 प्रमुख महासागर

अभियान के संबंध में जानकारी देते हुए मेजर कर्मजीत कौर ने बताया कि यह विश्व का ऐसा प्रथम समुद्री परिक्रमा अभियान था, जिसमें थल सेना, नौसेना एवं वायु सेना की वर्दीधारी महिला अधिकारी एक साथ सम्मिलित थीं।

इस दल ने 11 सितंबर 2025 को मुंबई तट से अपनी ऐतिहासिक यात्रा का शुभारंभ किया था और 314 दिनों की समयावधि में लगभग 25,500 समुद्री मील (करीब 47,000 किलोमीटर) की सुदीर्घ दूरी तय की। इस चुनौतीपूर्ण यात्रा के दौरान दल ने विश्व के चार प्रमुख महासागरों को सफलतापूर्वक पार किया।

🌍 भूमध्य रेखा को दो बार किया पार, प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय ‘केप हॉर्नर्स’ बिरादरी में हुईं शामिल

मेजर कर्मजीत कौर ने बताया कि साहसी महिला अधिकारियों ने अपनी यात्रा के दौरान भूमध्य रेखा (Equator) को दो बार पार किया तथा अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा (International Date Line) को लांघा।

इसके अतिरिक्त, दल ने विश्व के तीन अत्यंत खतरनाक अंतरीपों—केप ऑफ गुड होप, केप लीउविन और केप हॉर्न का सफलतापूर्वक चक्कर लगाया। इसके साथ ही भारतीय सेना की ये वीरांगनाएं प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय ‘केप हॉर्नर्स’ (Cape Horners) बिरादरी में आधिकारिक रूप से सम्मिलित हो गईं।

⛵ ‘आत्मनिर्भर भारत’ का प्रतीक स्वदेशी पोत ‘आईएएसवी त्रिवेणी’, विषम परिस्थितियों में भी नहीं मानी हार

मेजर कर्मजीत कौर के अनुसार, यह संपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय अभियान 50 फीट लंबे आईएएसवी त्रिवेणी (INSV Triveni) पोत पर संपन्न हुआ, जो पूर्णतः भारत में ही डिजाइन और निर्मित किया गया है।

यह पोत ‘आत्मनिर्भर भारत’ की इंजीनियरिंग उत्कृष्टता का एक सजीव प्रमाण है। यद्यपि यात्रा के दौरान अनेक बार ऐसी विकट परिस्थितियां आईं जब बोट में तकनीकी खराबी उत्पन्न हुई और दल के सदस्यों की जान पर बन आई थी, किंतु उन्होंने अदम्य साहस का परिचय देते हुए हार नहीं मानी और प्रत्येक बाधा को पार कर इस ऐतिहासिक यात्रा को पूर्ण किया।

👨‍👩‍👧‍👦 परिवार का मिला निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन, मेहनत ने लाया ऐतिहासिक रंग

मेजर कर्मजीत कौर ने साझा किया कि इससे पूर्व भी उन्होंने इसी पवन-चालित (Wind-Powered) बोट पर एक अभ्यास मिशन पूर्ण किया था, जिसे लेकर प्रारंभ में परिजनों के मन में सुरक्षा को लेकर संशय था।

किंतु टीम के सदस्यों के बुलंद हौसले को देखते हुए परिजनों ने उनका पूर्ण मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन किया। उनके पति कोमलप्रीत सिंह, पिता रिछपाल सिंह रंधावा, माता एवं भ्राता का निरंतर संबल और सहयोग प्राप्त हुआ, जिसका सुखद परिणाम आज पूरे राष्ट्र के सामने एक मिसाल बनकर उभरा है।

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